नमस्कार दोस्तों!
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई ट्रेन बिना पेट्रोल, बिना डीजल और बिना बिजली के तार के चल सकती है? और वो भी ऐसी ट्रेन जो धुएं की जगह सिर्फ “पानी” छोड़ती हो?
जी हाँ, यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की बात नहीं है। India First Hydrogen Train New India की हकीकत है। भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने इतिहास रचने की तैयारी कर ली है। देश की पहली Hydrogen Train जल्द ही पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि यह जादुई ट्रेन कहाँ चलेगी (Route), इसकी स्पीड (Speed) क्या होगी और इसमें ऐसा क्या खास है जो पूरी दुनिया इसकी चर्चा कर रही है, तो यह आर्टिकल अंत तक जरूर पढ़ें।
1. आखिर क्या है ‘India first Hydrogen Train’ और यह इतनी खास क्यों है?
सबसे पहले सरल भाषा में समझते हैं कि यह बला क्या है।
आजकल जो ट्रेनें हम देखते हैं, वो या तो डीजल इंजन से चलती हैं (जो बहुत धुआं छोड़ती हैं) या फिर बिजली (Electric) से, जिसके लिए पटरियों के ऊपर तार लगाने पड़ते हैं। लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन इन सबसे अलग है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल क्या है? (What is Hydrogen Fuel Cell?)

India First Hydrogen Train का दिल इसका ‘इंजन’ नहीं, बल्कि इसमें लगा ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ है। आप इसे एक “चलती-फिरती बिजली की फैक्ट्री” समझ सकते हैं।
- प्रोसेस: इसमें एक तरफ से हाइड्रोजन गैस (Hydrogen) डाली जाती है और दूसरी तरफ से हवा से ऑक्सीजन (Oxygen) ली जाती है।
- जादू: जब ये दोनों सेल के अंदर मिलते हैं, तो एक केमिकल रिएक्शन होता है। इस रिएक्शन से बिजली (Electricity) बनती है। इसी बिजली से ट्रेन का मोटर घूमता है और पहिये चलते हैं।
- धुआं नहीं, पानी निकलेगा: सबसे खास बात यह है कि डीजल ट्रेन से काला धुआं निकलता है, लेकिन फ्यूल सेल से धुएं की जगह सिर्फ भाप (Steam) और पानी की बूंदें निकलती हैं। यानी प्रदूषण बिल्कुल ZERO!
2. India First Hydrogen Train का रूट: जींद से सोनीपत (Jind-Sonipat Route)

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर—यह ट्रेन सबसे पहले कहाँ चलेगी और कब दिखेगी?
रेलवे ने इसके लिए हरियाणा को चुना है। India First Hydrogen Train का रूट जींद (Jind) और सोनीपत (Sonipat) के बीच तय किया गया है।
- रूट: जींद जंक्शन ⭢ गोहाना ⭢ सोनीपत
- कुल दूरी: लगभग 90 किलोमीटर
- ट्रायल डेट (Trial Date): रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, India First Hydrogen Train ट्रायल रन जनवरी 2026 (संभावित: 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के आसपास) शुरू होने की उम्मीद है। ट्रायल पूरा होते ही इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
- क्यों चुना यह रूट? जींद-सोनीपत रूट पर अभी तक बिजली के तार (Electrification) पूरी तरह नहीं लगे थे और यहाँ डीजल गाड़ियाँ चलती थीं। प्रदूषण कम करने और नई तकनीक को टेस्ट करने के लिए यह रूट एकदम परफेक्ट था।
3. India First Hydrogen Train स्पीड और फीचर्स: क्या यह ‘वंदे भारत’ जैसी होगी?
जी हाँ, देखने में और सुविधाओं में यह काफी हद तक वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ही आधुनिक (Modern) होगी। रेलवे इसे ‘Vande Metro’ (वंदे मेट्रो) के कांसेप्ट पर ला रहा है।
यहाँ इसके कुछ टेक्निकल फीचर्स दिए गए हैं जो आपको पता होने चाहिए:
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
| अधिकतम स्पीड (Top Speed) | 140 किमी/घंटा (ट्रायल में) |
| ऑपरेटिंग स्पीड | 100-110 किमी/घंटा (यात्रियों के लिए) |
| रेंज (एक बार भरने पर) | एक बार टैंक फुल करने पर यह 1000 किमी तक चल सकती है। |
| आवाज़ (Noise) | डीजल इंजन के मुकाबले इसमें 60% कम शोर होगा। |
| बोगी (Coaches) | इसमें 6 से 8 कोच हो सकते हैं, जो पूरी तरह AC होंगे। |

4. दुनिया में भारत का स्थान: हम किसी से कम नहीं!
आपको जानकर गर्व होगा कि हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला भारत दुनिया का कोई साधारण देश नहीं, बल्कि गिने-चुने देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है।
अभी तक पूरी दुनिया में सिर्फ जर्मनी (Germany) ने सबसे पहले कामर्शियल हाइड्रोजन ट्रेन चलाई थी। उसके बाद चीन (China) ने भी कोशिश की। अब भारत भी इस एलीट क्लब में शामिल हो रहा है।
- Make in India और बजट: India First Hydrogen Train ट्रेन पूरी तरह भारत में बनी है (चेन्नई की ICF फैक्ट्री में)। रिपोर्ट्स की मानें तो एक हाइड्रोजन ट्रेन को बनाने में करीब 80 करोड़ रुपये की लागत आई है।
- समय: हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स ने पिछले 2-3 सालों की कड़ी मेहनत के बाद इसे तैयार किया है, जिससे देश का काफी पैसा विदेश जाने से बचा है।
5. भविष्य की योजना: पहाड़ों पर भी दौड़ेंगी ये ट्रेनें
सिर्फ हरियाणा ही नहीं, रेलवे का प्लान बहुत बड़ा है। सरकार इस तकनीक को भारत के खूबसूरत पहाड़ी रास्तों (Heritage Routes) पर ले जाना चाहती है, ताकि वहाँ का पर्यावरण खराब न हो।
आने वाले समय में आपको इन जगहों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें दिख सकती हैं:
- दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (पश्चिम बंगाल)
- काлка – शिमला रेलवे (हिमाचल प्रदेश)
- नीलगिरि माउंटेन रेलवे (दक्षिण भारत)
- कांगड़ा घाटी रेलवे
- इन रास्तों पर डीजल इंजन से बहुत प्रदूषण होता है, जिसे खत्म करने के लिए हाइड्रोजन ट्रेन एक वरदान साबित होगी।
6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1: क्या India First Hydrogen Train का किराया (Ticket Price) महंगा होगा?
शुरुआत में यह नई टेक्नोलॉजी है, इसलिए इसका किराया सामान्य पैसेंजर ट्रेन से थोड़ा ज्यादा हो सकता है। जानकारों का मानना है कि इसका किराया AC Chair Car के आसपास हो सकता है।
Q2: क्या यह ट्रेन सुरक्षित है? हाइड्रोजन तो आग पकड़ती है?
बिल्कुल! रेलवे ने सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा है। हाइड्रोजन टैंक बुलेटप्रूफ मटीरियल से बने होते हैं जो बहुत मजबूत होते हैं। इनमें कई सेंसर लगे होते हैं जो लीकेज होने पर सिस्टम बंद कर देते हैं।
Q3: यह ट्रेन कब से शुरू होगी?
इसके ट्रायल रन जनवरी 2026 में शुरू होने की उम्मीद है। सब कुछ सही रहा तो 2026 के अंत तक आम जनता इसमें सफर कर सकेगी।
Q4: जब बिजली वाली ट्रेनें हैं, तो हाइड्रोजन ट्रेन की क्या जरूरत?
बिजली की ट्रेन चलाने के लिए पटरियों के ऊपर करोड़ों रुपये के तार (OHE Wire) लगाने पड़ते हैं। पहाड़ों या दूर-दराज के इलाकों में तार लगाना मुश्किल और महंगा होता है। वहां हाइड्रोजन ट्रेन सबसे अच्छा विकल्प है।
Q5: इसमें पानी कैसे बनता है?
फ्यूल सेल के अंदर जब हाइड्रोजन (H2) और ऑक्सीजन (O) मिलते हैं, तो H2O (पानी) बनता है। यह पानी भाप के रूप में ट्रेन से बाहर निकलता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों, हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारत के Green Future की तरफ एक बड़ा कदम है। जींद और सोनीपत के लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ी सौगात है। इससे न सिर्फ समय बचेगा बल्कि हमारा पर्यावरण भी साफ रहेगा।
आपको यह जानकारी कैसी लगी? क्या आप इस “पानी से चलने वाली ट्रेन” में सफर करना चाहेंगे? कमेंट करके हमें जरूर बताएं!
भारत बदल रहा है, हम भी बदलें!
दोस्तों, हमारा देश पर्यावरण को बचाने और सुरक्षित करने की राह पर हर दिन नई खोज के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी शानदार बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है ‘पीएम सूर्य घर योजना’।
तो सोचिए मत! आप भी देश की इस तरक्की में भागीदार बनिए और साथ ही अपना बिजली बिल जीरो करने का फायदा उठाइये।


