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UGC New Rules 2026: अगर आप कॉलेज या यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हैं, तो आपके लिए साल 2026 की शुरुआत में ही University Grants Commission (UGC) ने एक बहुत बड़ा धमाका कर दिया है।UGC New Rules 2026 के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए नए और सख्त नियम लागू किए गए हैं।
UGC ने हाल ही में “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” का नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार का कहना है कि यह नियम कॉलेजों में भेदभाव (Discrimination) रोकने के लिए है, लेकिन इसके सख्त नियमों (Strict Rules) और कमेटी के स्ट्रक्चर ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।
UGC क्या है और कब बना? (Brief History)
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भारत में उच्च शिक्षा (Higher Education) को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च संस्था है, जिसकी स्थापना 1953 में हुई थी (और 1956 में इसे वैधानिक दर्जा मिला)। इसका मुख्य काम देशभर के विश्वविद्यालयों को मान्यता देना और उन्हें फंड (Grant) जारी करना है। जहाँ तक भेदभाव विरोधी नियमों की बात है, UGC ने सबसे पहले 2012 में ‘Promotion of Equity’ रेगुलेशन बनाए थे। अब लगभग 14 साल बाद, UGC New Rules 2026 के तहत 2012 के पुराने नियमों को हटाकर नए और ज्यादा सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं।
एक तरफ जहाँ 24 घंटे में एक्शन की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ General Category (सामान्य वर्ग) के छात्र इसे अपने साथ अन्याय बता रहे हैं।
आखिर क्या है यह नया नियम? सुप्रीम कोर्ट का इसमें क्या रोल है? और शिकायत करने पर कितने दिन में फैसला आएगा? आइए आसान भाषा में सबकुछ समझते हैं।
UGC New Rules 2026: एक-एक नियम आसान भाषा में
Official UGC Notification 2026
Promotion of Equity Regulations (Full PDF)
UGC के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, नए नियमों को मुख्य रूप से 5 हिस्सों में बांटा गया है। यहाँ जानिए हर नियम का असली सच:
1. हर कॉलेज में ‘समानता सेल’ (Equal Opportunity Cell – EOC)
UGC New Rules 2026: अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी (चाहे सरकारी हो या प्राइवेट) को अपने कैंपस में एक Equal Opportunity Cell (EOC) बनाना अनिवार्य होगा।
- काम: UGC New Rules 2026 का मुख्य काम वंचित समूहों (SC, ST, OBC, PwD, Minorities) के लिए चलाई जा रही योजनाओं को लागू करना और उनकी समस्याओं पर नजर रखना होगा।
2. एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर (Anti-Discrimination Officer – ADO)
- हर संस्थान को एक ADO नियुक्त करना होगा।
- कौन बनेगा ADO? यह कॉलेज का ही कोई सीनियर प्रोफेसर (Professor/Associate Professor) होगा।
- जिम्मेदारी: यह ऑफिसर शिकायत और प्रशासन के बीच की कड़ी (Link) होगा। छात्र सीधे इसी ऑफिसर से संपर्क करेंगे।
3. कमेटी का गठन (The Equity Committee Structure)
यह UGC New Rules 2026 का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कॉलेज को एक कमेटी बनानी होगी जिसका कार्यकाल 2 साल का होगा। इसके सदस्यों की लिस्ट फिक्स कर दी गई है:
| पद (Designation) | कौन होगा? (Who) |
|---|---|
| 1. अध्यक्ष (Chairperson) | कॉलेज के प्रिंसिपल या वाइस चांसलर (VC) |
| 2. सदस्य सचिव | एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर (ADO) |
| 3. अनिवार्य सदस्य (Mandatory Members) |
इन 5 वर्गों का होना जरूरी है: 1. SC (अनुसूचित जाति) 2. ST (अनुसूचित जनजाति) 3. OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) (New) 4. महिला (Women) 5. दिव्यांग (PwD) |
| 4. नियम (Condition) | ऊपर दिए गए हर वर्ग से कम से कम: 👤 1 फैकल्टी (Teacher) 👤 1 स्टाफ (Staff) 👤 1 स्टूडेंट (Student) का होना अनिवार्य है। |
4. शिकायत और सुनवाई की प्रक्रिया (Strict Procedure)

अगर किसी छात्र के साथ भेदभाव होता है, तो प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- शिकायत: छात्र लिखित में या कॉलेज के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है।
- 24 घंटे का नियम: UGC New Rules 2026 की सबसे सख्त शर्त यह है कि शिकायत मिलने के बाद कोई भी संस्थान देरी नहीं कर सकता।
- जांच (Inquiry): कमेटी गवाहों और सबूतों की जांच करेगी।
- 15 दिन का नियम: जांच पूरी करके 15 दिन में रिपोर्ट हेड ऑफ इंस्टिट्यूशन को देनी होगी।
- 7 दिन का नियम: हेड को 7 दिन में दोषी व्यक्ति (चाहे वो छात्र हो या प्रोफेसर) के खिलाफ एक्शन लेना होगा।
5. भेदभाव किसे माना जाएगा? (What is Discrimination?)
UGC New Rules 2026 में भेदभाव की परिभाषा को पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और व्यापक बनाया गया है। UGC ने साफ किया है कि इन हरकतों को अपराध माना जाएगा:
- एडमिशन देने से मना करना या फॉर्म स्वीकार न करना।
- जाति, धर्म या पृष्ठभूमि के आधार पर क्लास में अपमानित करना।
- हॉस्टल, मेस, लाइब्रेरी या स्पोर्ट्स ग्राउंड का इस्तेमाल करने से रोकना।
- टीचर द्वारा जानबूझकर कम नंबर देना या फेल करना।
- स्कॉलरशिप के आवेदन को बिना कारण रोकना।
6. कॉलेज पर कार्यवाही (Punishment for Colleges)
अगर कोई कॉलेज UGC New Rules 2026 का पालन नहीं करता या शिकायत को दबाता है, तो UGC उस पर ये कार्यवाहियां कर सकता है:
- कॉलेज का फंड (Grant) रोका जा सकता है।
- कॉलेज की मान्यता (Recognition) रद्द की जा सकती है।
- UGC अपनी वेबसाइट और अखबारों में उस कॉलेज का नाम “डिफॉल्टर” के रूप में प्रकाशित करेगा
यानी अब आपकी शिकायत का निपटारा महीनों में नहीं, बल्कि 20-25 दिनों के अंदर हो जाएगा।
Official Website (UGC)
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विवाद क्यों? (General Category Controversy) 🔴
UGC New Rules 2026 का उद्देश्य समानता को बढ़ावा देना बताया गया है, यह अच्छी बात है। लेकिन असली विवाद उस “कमेटी” (Equity Committee) को लेकर है जिसे बनाने का आदेश दिया गया है। UGC ने साफ-साफ बताया है कि इस कमेटी में किन सदस्यों का होना अनिवार्य (Mandatory) है:
- ✅ 1 सदस्य SC (अनुसूचित जाति) से
- ✅ 1 सदस्य ST (अनुसूचित जनजाति) से
- ✅ 1 सदस्य OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) से
- ✅ 1 महिला सदस्य
- ✅ 1 दिव्यांग (PwD) सदस्य
नाराजगी का कारण:
सोशल मीडिया और छात्रों का कहना है कि UGC New Rules 2026 में “General Category” (सामान्य वर्ग) या EWS के लिए कोई सीट रिजर्व नहीं की गई है। छात्र सवाल उठा रहे हैं कि “अगर किसी जनरल कैटेगरी के छात्र के साथ रैगिंग या भेदभाव होता है, तो कमेटी में उसकी बात रखने वाला कौन होगा?” इसी वजह से इसे एकतरफा फैसला बताया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: 2019 से 2026 तक का सफर (Supreme Court Angle)

यह UGC New Rules 2026 रातों-रात नहीं बना है, बल्कि यह दो माताओं की 6 साल लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में UGC को कई बार फटकार लगाई, सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही UGC New Rules 2026 को इतनी कड़ी समय-सीमा के साथ लागू किया गया।
1. याचिका की शुरुआत (The Petition – August 2019): अगस्त 2019 में रोहित वेमुला (Hyderabad University) और पायल तड़वी (TN Topiwala National Medical College) की माताओं—राधिका वेमुला और अबेदा सलीम तड़वी—ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की।
- केस का नाम: Abeda Salim Tadvi & Anr. v. Union of India & Ors. (Writ Petition No. 1149/2019)।
- मांग: उन्होंने कोर्ट से कहा कि कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए 2012 के नियम नाकाफी हैं और उनका पालन नहीं हो रहा, इसलिए सख्त कानून बनाए जाएं।
2. सुप्रीम कोर्ट का आदेश (The Order – 3 January 2025): सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां) ने UGC को कड़ी फटकार लगाई।
- 3 जनवरी 2025 को कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि “सिर्फ कागजों पर नियम नहीं चलेंगे, हमें जमीनी स्तर पर बदलाव चाहिए।” कोर्ट ने UGC को 6 हफ्ते (6 Weeks) का समय दिया कि वो नए और सख्त नियम बनाकर लाए।
3. अंतिम फैसला और नोटिफिकेशन (The Final Notification – January 2026): सुप्रीम कोर्ट के लगातार दबाव के बाद, UGC ने आखिरकार 13 जनवरी 2026 को ‘UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026’ का नोटिफिकेशन जारी किया।
- यही कारण है कि UGC New Rules 2026 में “24 घंटे में मीटिंग” और “7 दिन में एक्शन” जैसी सख्त टाइमलाइन दी गई है, ताकि कोई भी कॉलेज लापरवाही न कर सके।
OBC छात्रों के लिए बड़ी खबर
आपको बता दें कि 2012 के पुराने नियमों में OBC छात्रों का स्पष्ट जिक्र नहीं था। लेकिन UGC Regulations 2026 में पहली बार OBC वर्ग को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जो आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए राहत की खबर है।
कमेटी क्या काम करेगी?
हर कॉलेज में बनने वाली यह “Equity Committee” और “Anti-Discrimination Officer” इन मुद्दों को देखेंगे:
- एडमिशन में भेदभाव की शिकायत।
- क्लास, मेस या हॉस्टल में किसी छात्र को परेशान करना।
- जाति, धर्म या भाषा के नाम पर टिप्पणी करना।
- स्कॉलरशिप या सरकारी सुविधाओं में गड़बड़ी।
पुराने और नए नियम में अंतर
- 2012 के नियम: पुराने नियमों में एक क्लॉज (Clause) था कि अगर शिकायत “तुच्छ या दुर्भावनापूर्ण” (Frivolous or Malicious) पाई जाती है, तो शिकायत करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
- 2026 के नियम: नए नियमों में से यह क्लॉज हटा दिया गया है। यानी अगर आरोप झूठा निकलता है, तो भी शिकायतकर्ता पर कॉलेज प्रशासन कोई सख्त कार्रवाई करने के लिए बाध्य नहीं है।
1. UGC का तर्क क्या है?
UGC और समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सजा का प्रावधान इसलिए हटाया ताकि असली पीड़ित (Victims) डरें नहीं।
- अक्सर ऐसा होता है कि पीड़ित के पास सबूत नहीं होते।
- अगर सबूत न होने पर शिकायत खारिज हो जाए और उल्टे पीड़ित को ही सजा मिलने का डर हो, तो कोई भी शिकायत करने आगे नहीं आएगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. शिकायत मिलने के कितने दिन बाद एक्शन होगा?
नए नियम के मुताबिक, शिकायत के 24 घंटे में पहली मीटिंग होगी और फाइनल एक्शन रिपोर्ट मिलने के 7 दिनों के अंदर लिया जाएगा।
Q2. यह नियम किन कॉलेजों पर लागू होगा?
यह नियम देश के सभी सरकारी (Government) और प्राइवेट (Private) कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज पर लागू होगा।
Q3. Anti-Discrimination Officer कौन होता है?
यह कॉलेज का एक प्रोफेसर या सीनियर अधिकारी होगा जो छात्रों की शिकायतों को सुनेगा और उसे हल करने के लिए कमेटी के साथ काम करेगा।
Q4. शिकायत कैसे दर्ज करानी होगी? (Offline या Online)
छात्र अपनी शिकायत लिखित (Written) रूप में एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर को दे सकते हैं। इसके अलावा, नए नियमों के अनुसार हर कॉलेज को अपनी वेबसाइट पर एक “ऑनलाइन शिकायत पोर्टल” भी बनाना होगा जहाँ आप घर बैठे शिकायत कर सकेंगे।
Q5. अगर कॉलेज फिर भी एक्शन न ले तो क्या करें?
अगर 7 दिन के अंदर कॉलेज कोई कार्यवाही नहीं करता है या आप उनके फैसले से खुश नहीं हैं, तो आप “लोकपाल” (Ombudsman) के पास अपील कर सकते हैं या सीधे UGC की वेबसाइट पर जाकर कॉलेज की शिकायत कर सकते हैं।
Conclusion:
दोस्तों, एक ब्लॉगर और स्टूडेंट होने के नाते, मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट और UGC की यह पहल स्वागत के योग्य है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे होनहार छात्रों के साथ जो हुआ, वह किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। भेदभाव मुक्त कैंपस हर छात्र का अधिकार है।
अंत में, विश्लेषण करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यूजीसी की मंशा भले ही दबे-कुचले वर्गों को सुरक्षा देने की हो, लेकिन धरातल पर यह नियम ‘न्याय’ से ज्यादा ‘एकतरफा तुष्टिकरण’ की ओर झुका हुआ नजर आता है।
झूठी शिकायत पर सजा का स्पष्ट प्रावधान न होना, इसे कॉलेज कैंपस में ‘लीगल ब्लैकमेलिंग’ का हथियार बना सकता है। जिस गुटबाजी को रोकने के लिए छात्र संघ चुनाव बंद किए गए थे, आशंका है कि यह नियम उसी गुटबाजी को ‘जातिगत संघर्ष’ के रूप में वापस ले आए।
सच्चा समावेश (Inclusion) डराकर नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर आता है। कानून ऐसा होना चाहिए जो पीड़ित को न्याय दिलाए, लेकिन बेगुनाह को शिकार न बनाए। हालांकि, यह भी सच है कि UGC New Rules 2026 का असली असर उनके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा।
खैर, यह मेरी निजी राय है। हो सकता है आप मुझसे सहमत न हों।
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